परतदार पेपर-कट
ऑफ़िस दिवाली के लिए कटे काग़ज़ की परतें: गणेश, फ़ोटो फ़्रेम और दीया क्रीम दीवार पर काग़ज़ की कतरनों की तरह रखे जाते हैं, और दीयों-पौधों वाली मेज़ और शाम का शहर अलग-अलग रफ़्तार से सरकते हैं।
स्नेहपत्रिका के आख़िरी दृश्य के साथ मुफ़्त · बिना उसके ₹99
यह वीडियो निमंत्रण बनाएँइस शैली के बारे में
काग़ज़ से आकृतियाँ काटना सबसे पुराने सजावटी शिल्पों में से एक है, मथुरा की साँझी के स्टेंसिल से लेकर चीन के जियानझी और मेक्सिको के पापेल पिकादो तक। परतदार पेपर-कट इसका आधुनिक रूप है: कलाकार रंगीन मैट कार्ड की शीटों से हर आकृति हाथ से स्कैल्पेल से काटता है, फिर परतों को एक के ऊपर एक जमाता है, कभी-कभी बीच में छोटे टुकड़े रखकर, ताकि हर शीट नीचे वाली पर हल्की-सी छाया डाले। कुछ ही रंग, साफ़ किनारे और खुली जगह चित्र को गहराई देते हैं।
इस वीडियो में दिवाली पर सजा एक ऑफ़िस कटे कार्ड से बना है: क्रीम दीवार, शाम के शहर की ओर खुलती खिड़की, और दीयों, पौधों और मिठाई के डिब्बे वाली शेल्फ़। गणेश, फ़ोटो फ़्रेम और दीया एक-एक करके दीवार पर कटे कार्ड की तरह रखे जाते हैं, और शेल्फ़ और शहर अलग-अलग रफ़्तार से सरकते हैं, जैसे कैमरा चलने पर काग़ज़ की परतें सरकती हैं। यह कलाकृति इस वीडियो के लिए परतदार पेपर-कट की शैली में बनाई गई है; इसे हाथ से नहीं काटा गया है।
और वीडियो निमंत्रण
- पिछवाई कमल सरोवर
- कंदील की रात
- वारली रात
- सुनहरा वर्क़, नीली रात
- रंगोली आँगन
- मधुबनी
- कच्छी शीशा कढ़ाई
- रेट्रो पोस्टर
- सुनहरा तंजौर
- मिट्टी की दिवाली
- पैठणी फराल
- फराल की रसोई
- चित्रकथी लक्ष्मी पूजन
- गंजीफ़ा लक्ष्मी
- रोगन जीवन-वृक्ष
- जामनगरी बांधनी
- माता नी पछेड़ी
- संखेड़ा दुकान
- वाड़े की भोर
- संस्कार भारती रंगोली
- दिवाली का किला
- सोसाइटी के कंदील
- पिथोरा के घोड़े
- पाटन पटोला
- लिप्पन माटी-शीशा
- अहमदाबाद की पोल
- बंबई आर्ट डेको
- लिनोकट भोज
- शिवकाशी माचिस
- फड़ लक्ष्मी पूजन
- साँझी लक्ष्मी
- कांगड़ा दिवाली मिलन
- किशनगढ़ गोवर्धन
- ऐपण भाई दूज
- सोहराई धनतेरस