सुनहरा तंजौर
सुनहरी तंजौर चित्रकला में लक्ष्मी, बाती-बाती जलते पीतल के दीप, सोने पर दौड़ती रोशनी और हाथियों-तोतों की सवारी।
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तंजौर, यानी तंजावुर, चित्रकला तमिलनाडु के तंजावुर की है और उन नायक और मराठा शासकों के संरक्षण में फली-फूली, जिन्होंने इस क्षेत्र पर 16वीं से 19वीं सदी तक शासन किया। चित्र कपड़े से मढ़े लकड़ी के पट्टे पर बनता है। मुकुट, गहनों और मेहराबों के लिए चॉक और गोंद की लेई को हल्के उभार में चढ़ाया जाता है और उस पर सोने के पतले वर्क़ दबाए जाते हैं, कभी-कभी काँच या पत्थर के छोटे टुकड़े भी जड़े जाते हैं। मेहराब के बीच अक्सर कोई देवता दिखाया जाता है, और लक्ष्मी प्रिय विषय हैं। तंजावुर चित्रकला को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्राप्त है।
इस वीडियो में लक्ष्मी सुनहरी मेहराब के भीतर विराजती हैं, पीतल के दीप बाती-बाती जलते हैं, सोने पर रोशनी दौड़ती है, और नीचे हाथियों और तोतों की सवारी गुज़रती है। यह कलाकृति तंजौर शैली में बनाई गई है; इसमें सोने के वर्क़ का उपयोग नहीं हुआ। आपकी फ़ोटो, नाम और संदेश आगे दिखते हैं।
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