फड़ लक्ष्मी पूजन
परदे पर खुलता राजस्थानी फड़, जैसे भोपा गायक रात में उसे खोलते हैं: अपने पट पर लक्ष्मी और गणेश, दीया उठाए भोपी, और लक्ष्मी के पगलियों तक दीये ले जाती स्त्रियाँ।
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यह वीडियो निमंत्रण बनाएँइस शैली के बारे में
फड़ राजस्थान की पट-चित्र कला है, जिसे शाहपुरा और भीलवाड़ा के जोशी परिवार के चितेरे सदियों से बनाते आए हैं। फड़ एक लंबा कपड़ा होता है, अक्सर कई मीटर लंबा, जिसे माँड़ लगाकर कड़ा किया जाता है और पत्थर से घिसकर चिकना किया जाता है, फिर खनिजों और वनस्पतियों से पीसे रंगों से रंगा जाता है। रंग एक-एक करके भरे जाते हैं, पहले पीला और सबसे अंत में मोटी काली रेखाएँ। इन फड़ों में लोकदेवता पाबूजी और देवनारायण की गाथाएँ होती हैं, और हर फड़ एक चलता-फिरता मंदिर है: भोपा, यानी पुजारी-गायक, उसे लपेटकर गाँव-गाँव ले जाता है और रात भर रावणहत्था बजाते हुए कथा गाता है, जबकि भोपी चित्र के उस हिस्से पर दीया उठाकर रोशनी करती है जिसकी कथा गाई जा रही होती है।
यह वीडियो ऐसे ही फड़ को परदे पर खोलता है, जैसे भोपा हर प्रसंग के लिए उसे खोलता है: अपने पट पर लक्ष्मी और गणेश, रंगी किनारी के भीतर आपकी पारिवारिक फ़ोटो, भोपा और उसके रावणहत्थे के पास दीया उठाए भोपी, और नीचे की पट्टी में पूजा के लिए लक्ष्मी के पगलियों तक दीये ले जाती स्त्रियाँ। ये चित्र इस वीडियो के लिए फड़ शैली में बनाए गए हैं; ये भीलवाड़ा के जोशी चितेरों के बनाए नहीं हैं।
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