कंदील की रात
काग़ज़ के आकाश कंदील, कमल पर लक्ष्मी, फुलझड़ियाँ और अनार, दिवाली से जगमगाती गली में।
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यह वीडियो निमंत्रण बनाएँइस शैली के बारे में
आकाश कंदील महाराष्ट्र के कई घरों में दिवाली की जानी-पहचानी निशानी है। त्योहार पास आते ही उसे घर के बाहर या बालकनी में टाँगा जाता है और शामों को जलाए रखा जाता है। पारंपरिक कंदील तारे के आकार का होता है, बाँस के ढाँचे पर रंगीन काग़ज़ चढ़ा होता है, नीचे काग़ज़ की लंबी झालरों की पूँछ होती है और भीतर दीपक या बल्ब। परतदार पेपर-कट (काग़ज़ की कटाई वाली कला) एक अलग शिल्प है, जिसकी सामग्री भी काग़ज़ ही है: रंगीन काग़ज़ को काटकर परतों में जमाया जाता है, ताकि हर परत अपने पीछे की परत पर हल्की छाया डाले और चित्र सपाट होकर भी गहरा दिखे।
यह वीडियो उसी शैली में बना है: काग़ज़ के तारे, कंदील और फूल, कमल पर विराजी लक्ष्मी, और खपरैल के घरों वाली गली में जलती फुलझड़ियाँ और अनार। अनार वह पटाखा है जो छोटे गमले जैसे पात्र से चिंगारियों का फव्वारा उछालता है, और फुलझड़ी हाथ में पकड़ी जाने वाली चिंगारी की छड़ी है। यह कलाकृति पेपर-कट शैली में बनाई गई है, काग़ज़ काटकर नहीं। आपका संदेश रात के आसमान के ऊपर लिखा दिखता है।
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